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31 May 2020 · 1 min read

मजदूर

दुसरो के आशियाने बनाने ।
निकल पड़ा, चंद रुपये कमाने ।
अपने नशेमन से पलायन कर ।
छोटी सी झुग्गी में रहकर ।
गर्मी की कड़ी धूप सहकर ।

दर बदर यू ही काम की तलाश में ।
कही पर भी रहने को मजबूर ।
पेट की बड़वाग्नि शांत करने ।
संघर्ष रत मजदूर ।

© गोविन्द उईके

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