Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
31 May 2020 · 1 min read

रूह की आस

अरसा गुजर गया
चमन को उजड़े हुए
तेरी सांसों की महक
आज भी है ।

घने पेड़ों के
लम्बे सायो मे
गुजरे लम्हो की परछाई
आज भी है ।

तेरे प्यार के
अल्फाज की गूंज
उन वादियों मे
आज भी है ।

जिस्म राख हो जायेगा
तुझे मिलने की
रूह को आस
आज भी है ।।

राज विग 31.05.2020.

Loading...