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31 May 2020 · 1 min read

गीत

अधरों पर घुलता रहा, जीवन का संगीत।
अपनी परछाई मुझे, क्यों करती भयभीत।। १

है जीवन संगीत-सम,हँसते-गाते झूम।
सुर छिड़ जाये कौन- सा,किसको है मालूम।। २

साँस-साँस सुर से सजी,जीवन है संगीत।
सुख दुख है स्वर की लहर,गा कर पाओ जीत।। ३

सत कर्मों की बाँसुरी,छेड़े मधुरिम गीत।
व्याकुलता को त्याग कर, इससे कर लो प्रीत।। ४

कभी शोर में गीत है, कभी गीत में शोर।
मन के भावों से जुड़ी, जीवन की हर डोर।। ५

सजा हुआ संगीत से, जीवन का हर अंश।
है जीवन इसके बिना, केवल चुभता दंश।। ६

-लक्ष्मी सिंह

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