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28 May 2020 · 1 min read

वक़्त

है वक़्त
बड़ा बलवान
अविरल
घुमता चक्र
सुबह-ओ-शाम
बनता राजा से रंक
और रंक से राजा

घुमती रहती
जिन्दगी
पहिये सी
ठहरती नहीं
जिन्दगी
जब तक हैं
प्राण
इन्सान में

खोजा
जीरो ( 0)
भारत ने
हुआ फिर
आविष्कार
पहिये का
हुई आसान
जिन्दगी
मिली गति
मानव को

है रिश्ता
पति पत्नी के बीच
एक गाड़ी सा
चले पहिये
बराबरी से
हंसी-खुशी
खट्टी मीठी सी
है जिन्दगी

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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