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26 May 2020 · 1 min read

जमीन

हैरान हैं उड़ते हुए परिन्दे
देखकर इंसान की लाचारी
और अकेलापन
इंसान को खुद की ही बनाई
एक चारदीवारी में कैद
संक्रमण का जैविक आपदा से
अजीब सा डर है चेहरे पर इंसान के
नहीं निकल पा रहा है वह बाहर
फड़फड़ा रहा है अपने घर में
पिंजरे में कैद परिन्दे की तरह
देखकर जमीन अपनी………..
गुमान रहता है इंसान को
सामर्थ्य पर अपने
छू लेने का आकाश की ऊंचाइयां
पहुंचकर किसी ऊंचाई पर
नहीं पड़ते हैं पांव ज़मीन पर उसके
भूल जाता है अक्सर जमीन अपनी…..
परिन्दे जानते हैं आना है उनको
पेड़ों पर बने घोसलों में अपने
भरने के बाद सामर्थ्य से ऊंची उड़ान
आकाश की ऊंचाई के साथ
भूलते नहीं हैं कभी जमीन अपनी……..

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