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24 May 2020 · 1 min read

कोई जन्नत मुक़ाबिल नहीं रहा।

कोई जन्नत मुक़ाबिल नहीं रहा,
जब से ये जहन्नूम जाहिल नहीं रहा।
ये वो जहन्नूम जो निगलता गया-
आज हय भर का क़ातिल नहीं रहा।।

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