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24 May 2020 · 1 min read

माँ

ना पैरो तले जमीं, न सर पे आसमाँ है।
मेरा वजूद , मेरा अस्तित्व, मेरी माँ है।
मेरी इबादत , मेरी हसरत, अंधेरे जीवन में जो शमा है।
मेरा वजूद, मेरा अस्तित्व, मेरी माँ है…….।।
मेरी खुशी , मेरी हँसी, लबों पे मुस्कुराहट का जो फ़लसफ़ा है।
मेरा वजूद, मेरा अस्तित्व , मेरी माँ है …..।।
मेरी सरहदें, मेरी मकसदें, मेरे उसूलों का जो रहनुमा है।
मेरा वजूद , मेरा अस्तित्व , मेरी माँ है….।।
प्यार की बयार वो, खुशियों की कतार वो,
दुआओं के लिये खुलती जिसकी जुबां है।
मेरा वजूद, मेरा अस्तित्व, मेरी माँ है….।।
डांट उसकी मुझे संस्कार दे, ममता का मुझे जो अंबार दे,
खुदा को भी जिस नैमत पर गुमां है।
मेरा वजूद , मेरा अस्तित्व , मेरी माँ है…..।।
कई गुब्बार मन में उसके, खामोशियाँ कथन में उसके,
जो ममता और दुआओं की दास्ताँ है।
मेरा वजूद, मेरा अस्तित्व, मेरी माँ है…।
न पैरो तले जमीं, न सर पे आसमाँ है।
मेरा वजूद, मेरा अस्तित्व, मेरी माँ है…।।

समर्पित- माँ को
✍️ देवेंद्र

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