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24 May 2020 · 1 min read

किसी मोड़ में

■ किसी मोड़ में
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जिंदगी के इस भागदौड़ में,
तुझे पा न सके आशिकों की हौड़ में ,
★★★
पता है तू सबसे जुदा है,
मिलता नही ऐसा कोई लाख-करोड़ में ।
★★★
आवारगी थी छाई, बेपरवाह थे हम,
फिरते रहे दर – बदर , तमन्नाओं के जोड़ – तोड़ में ।।
★★★
तमाम कोशिशों के बावजूद हार गया मैं,
दरमियां रिश्तों के गठजोड़ में।
★★★
अंजान था मैं, और नादान भी,
छूट ही जाती है मंजिल अकसर थाम- छोड़ में।।
★★★
क्या हुआ जो क़ाबिल न था तेरे,
इस मर्ज की दवा भी तो न थी मेरे “जी-तोड़” में।
★★★
हमारा जुदा होना इत्तिफ़ाक़ था,*
आज नही तो कल मिलेंगे फिर किसी मोड़ में।

—————————————

✍✍ देवेंद्र

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