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22 May 2020 · 2 min read

■【【हमे मानव मोल चुकाना है】】■

प्रेम के पथ पे जाना है
मन उपवन में पुष्प खिलाना है।
दिखा के सब पे दया दृष्टि
हमे मानव मूल चुकाना है।

सो चुकी जो मानवता
दिल मे उसे जगाना है।
मानव को मानव कर्मों का
फिर से अहसास कराना है।

इंसानी रूप में आए हम
हमे इंसानी रूप दिखाना है।
अंधकार की घनी गुफ़ा में
प्रकाश हमे फैलाना है।

जीव जंतु और वनस्पति
सबको हमे बचाना है।
अपने इस कर्तव्य से
हमे मुँह नही फिराना है।

भटक रहे को राह सदा
सही हमे दिखाना है।
हर पथिक को हमको।
उसकी मंज़िल तक पहुंचाना है।

लोभ सागर में डूबे लोगों को
बाहर लेकर आना है।
मन मस्तिष्क में छिपे विकारों को
हमे ही दूर हटाना है।

लूट मार की कूटनीति से
दूरी हमे बनाना है।
हमे इंसानी जन्म मिला है
हमे इंसानी फ़र्ज़ निभाना है।

देना है हमे साथ सभी का
जीवन संग बिताना है।
रोते हुए को हँसाना है
दुःख को साथ बंटाना है।

रख लालसा यश अपयश की
न मानव मूल्य गिराना है।
हाँथ पकड़ संतोष का
मानव धर्म पे चलते जाना है।

भूखे का भर के पेट
प्यासे को पानी पिलाना है।
दब गई जो मानवता मिट्टी में
फिर से उसे उठाना है।

मिला जो जीवन क़ीमती
उपयोगी उसे बनाना है।
माँ धरती के सीने पर
मानवता का बीज लगाना है।

अहंकार को भस्म कर
परोपकार का दिया जलाना है।
बैर भुलाकर बैरी से
अपनत्व का हाथ बढ़ाना है।

बन गया है समाज राछश
इसे फिर इंसान बनाना है।
अच्छाई इंसानी धर्म है
ये सबको याद दिलाना है।

पैसा नही परिवार हमारा
परिवार ये जमाना है।
सबको अपना मानकर
बंधुत्व का शंदेश फैलाना है।

मार काट और खून खराबा
पे हमको रोक लगाना है।
है ये इक़ महापाप
ये सबको हमे बताना है।

सही गलत का फ़र्क़ हमे
अब स्वयं को समझाना है।
मोह माया के जाल से
छुटकारा हमको पाना है।

है कर्म हमारा ईश्वर भक्ति
हमे गीत उसी का गाना है।
इस इंसानी रूप का
हमे मानव मूल चुकाना है।

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