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22 May 2020 · 1 min read

प्रार्थना !..

है ! ईश्वर दुःखित है संसार,
विपदा आई है द्वार द्वार,
भटक रहे है सब मारे मारे,
अपनी किस्मत से हारे हारे,

देखो धरा पर है उथल पुथल,
क्या होगा आने वाला कल,
मुश्किल से बीत रहे पल पल,
चहुँओर बैठे आज खल दल,

देखो मच रही खींचा तानी,
हौड़ लगी बनने राजा रानी,
कौन सुनेगा हमारी कहानी,
हमको समझते बहता पानी,

कितने भेदभाव यहाँ पलते,
कैसे बिन आशियाना रहते,
कितनी चिंताए सब लाद बैठे,
अपनो से सपनो से हुए रूठे,

है ! ईश्वर ऐसा एक वर दीजिए,
संसार सुखी रहे रहम कीजिए,
अर्पण करता हूँ प्रसून लीजिए,
रोग शोक जग से दूर कीजिए,
—- जेपीएल

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