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22 May 2020 · 1 min read

चार हाइकु ..."प्रीत मियादी"

चार हाइकु …”प्रीत मियादी”

हुआ था आदि l
पर प्रीत मियादी l
हुई बर्बादी l

तू रखता है l
रखे सुंदरता है l
वो जागता है l

बस सोता है l
रोना ही रोता है l
खासा खोता है l

सब साथ है l
खुशियाँ सौगात है l
ये यथार्थ है l

अरविन्द व्यास “प्यास”

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