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21 May 2020 · 1 min read

बात भी कहना ज़रूरी

यूँ तो हर ख़्वाहिश अधूरी
बात भी कहना ज़रूरी

जी लिए यूँ उम्र काफ़ी
हर तमन्ना पर अधूरी

सोच का आधार आधा
कहने को हर चीज़ पूरी

दुश्मनों की भीड़ में भी
मारता है दोस्त छूरी

मौत हमको ले चली है
ज़िन्दगी जी कर अधूरी

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