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20 May 2020 · 1 min read

तेरी औकात ही कुछ नही

जो तू हो रहा इस तरह तबाह है
तुझे याद है क्या क्या तेरे गुनाह है

कारखानों का मल नदियों में बहाता था
थूकता था आसमान की ओर धुआं और मुंह चिडाता था
धुंए के तूने गुबार उठा रखे थे
इतने खूबसूरत पहाड़ धुँए में छुपा रखे थे
और सोचता था मैं मैं मैं और मैं ही मैं हूं
पर उसने बता दिया

तेेेरी औकात ही कुछ नही बात ये साफ कर रहा है
वो ऊपर वाला तेेरे गुनाहों का इंसाफ कर रहा है

तू रहा जिस कुदरत के खिलाफ हमेशा
वो उस कुदरत को अब तेरे खिलाफ कर रहा है
वो ऊपर वाला तेेरे गुनाहों का इंसाफ कर रहा है

जंगल उजाडे कितने, कितने पेड़ थे काटे
अपने बच्चो की मौत का वो हिसाब कर रहा है
वो ऊपर वाला तेेरे गुनाहों का इंसाफ कर रहा है

बहुत गर्द चढी थी “मैं मैं की” दिलो दिमाग पे तेरे
रगड़ रगड़ के उस गर्द को वो साफ कर रहा है
वो ऊपर वाला तेेरे गुनाहों का इंसाफ कर रहा है

कुत्ते की दुम है इंसान कब सुधरा है जो सुधरेगा
अपने हाथ अपनी मौत का सामान कर रहा है

वो ऊपर वाला तेेरे गुनाहों का इंसाफ कर रहा है
तेरी औकात ही कुछ नही बात ये साफ कर रहा है
—ध्यानूप

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