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19 May 2020 · 2 min read

एक लाख पार!!

लो हो गये हम भी,एक लाख के पार,
इतने लोगों ने झेल लिया है,
इस महामारी का वार ।

अब हम भी तो हो गये,
उन देशों में सुमार,
एक लाख से ज्यादा,
हुए जहां बिमार।

वैश्विक है यह बला,
बतलाते हैं सब,
हम कैसे वंचित रहें,
हैं बना जो एक लाख का क्लब ।

वह अपने को विशिष्ट समझते थे,
और हमें निक्रिष्ठ,
अब हमने भी जता दिया है,
अपने को श्रेष्ठ।

वह अपने को विकसित राष्ट्र बतलाते रहते थे,
और हमें अविकसित की श्रेणी में पाते थे,
अब हमने उनको भी जता दिया है,
एक लाख का आंकड़ा पार किया है।

आज विश्व में हम ग्यारवें पायदान पर हैं,
और हमसे आगे, वह देश हैं,
जिनकी अर्थ व्यवस्था का क्रम,
टौप थ्री में होता रहा है।

यह अलग बात है,
हमें अब भी, भुखमरी में,
सौवां स्थान भी हासिल नहीं हो पाया,
हाल ही में बना ,यह बंगला देश,
हमसे बेहतर स्थिति में आया।

किन्तु बंगला देश जैसों से,
अपनी प्रतिस्पर्धा नहीं है,
हमारी निगाह तो, चीन और अमेरिका पर लगी है।

हमने इस कोरोना के मामले में,
चीन को पछाड़ कर, पीछे छोड़ दिया है,
हम आज भी अपना निर्यात,
भले ही कम करते हों,
पर आयात में हमने कितनों का रिकॉर्ड तोड दिया है।
यकिन ना हो तो,
कोरोना को ही देख लो,
हर देश से हमने इसका आयात किया है,,
हमने आत्मनिर्भरता का वचन दिया है,
हमें कमतर आंकना छोड़ दो।

सार्वजनिक उपक्रमों ने हमें भरोसा नहीं दिया,
निजी क्षेत्रों में, हमने निवेश बढ़ाना शुरू किया ,
श्रमिकों का कौन झंझट पाले,
कौन रोज रोज की हड़ताल टालें,
अपने उद्यमियों को सशक्त बनाओ,
और अपनी सुविधानुसार, उनसे चन्दा पाओ।

ये चाहे आपातकाल में, जनता के काम ना आएं,
यह चाहे अपने श्रमिकों का हित ना चाहे,
यह चाहे देश की धन दौलत को बाहर ले जाएं,
यह चाहे तो,ऋण ना चुकाएं,
यह चाहे हर बार कोई बहाना बना कर,
लाखों करोड़ की टैक्स में छूट को पाएं।

इन पर भरोसा करते हैं हम,
इनमें है सरकारों को बनाने, बिगाड़ने का दम,
मजदूरों की बात करके ,समय जाया ना करो,
किसानों की आत्हत्या से हमें डराया ना करो,
अमीर , गरीब का भेद तो रखना ही है,
वोटों के लिए इन्हें लुभाना भी तो है,
चुनावों से पहले कुछ खैरात बांट देंगे,
और लुभावने वायदों पर,यह हमीं को वोट देंगे।

लखपति बनने का सुख ही कुछ और है,
लखपति बने हैं, तो फिर कुछ होना चाहिए,
सरकारी उपक्रमों को बेचना चाहिएं,
लखपति बन जाने के बाद,
अब करोड़ पति की ओर कदम बढ़ाया है,
सरकारी उपक्रमों को बेच कर पैसा अपने पास ही तो आया है।।

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