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19 May 2020 · 1 min read

ग़ज़ल लिख दू

कभी बेखुदी में कभी संभल संभल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कुछ लिखू पहले सी कुछ बदल बदल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

तेरे होठो को कभी गुलाब कभी कमल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कभी तेरे आगोश में कभी आगोश से निकल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कभी लिखू संभल के कभी फिसल फिसल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू
—ध्यानू

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