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18 May 2020 · 1 min read

राह

हो भले ही रात गहरी
भोर किरण अब दूर नहीं
रख यकीं रख यकीं

आ के इतनी दूर पंथी
राह तजना अब नहीं
रूक नहीं रूक नहीं

है थका हर एक रोम
पग उठाना दुष्कर अति
थम नहीं थम नहीं

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