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16 May 2020 · 1 min read

किसे खबर थी मुलाकात भी हो जाएगी

किसे खबर थी मुलाकात भी हो जाएगी
मिलेंगे और कभी बात भी हो जाएगी

बहार खिलने लगेंगी खिज़ा के मौसम में
यूँ तपते सहरा में बरसात भी हो जाएगी

अगर रहे कोई कायम यकीन पर अपने
तो ज़िंदगी में करामात भी हो जाएगी

किसी को धोखा दें फितरत नहीं हमारी ये
अगर यूँ शह दी कभी मात भी हो जाएगी

जवाब चाहिए मेरे सवाल का ‘सागर’
अगर मगर मैं यहाँ रात भी हो जाएगी

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