Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
16 May 2020 · 1 min read

जाने की जल्दी,मुक्तक,

लाक डाउन के समय अप्रैल, मई सन 2020
हमको तो बस घर जाना है, हो कितनी भी दूर,
पैदल ही हम चले जाँयगे, हम तो हैं मजबूर |
शासन कहता करें व्यवस्था, भेजें रेल, बसों से,
लेकिन उनको जल्दी इतनी, माने ना मजदूर |

बीबी बच्चे साथ आपके, बहुत दूर जाना है,
पैदल कैसे चल सकते हो, झंझट भी नाना हैं |
पन्द्रह सौ मीलों की दूरी, मानो बहुत कठिन है,
शासन कहता हम भेजेंगे, धीरज रख पाना है |

दस बारह दिन बाद चले जो, पंहुचे वही ठिकाने,
केरल, कर्नाटक से आये, जो भी कहना माने |
अपने अपने राज्य पँहुच कर,बस से पंहुचे घर तक,
खाना, पीना मुफ्त रहा है, नहीं रहे अनजाने |

Loading...