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16 May 2020 · 1 min read

समय के साथ

जो समय के साथ थे ,
आगे बढ़े ।

उन्नति की सीढ़ियां ,
वो ही चढ़े ।।

जो प्रतीक्षा समय की ,
करते रहे ।
वो समय के साथ ही ,
मरते रहे ।।

जो घरोंदे में सिमट ,
सोते रहे ।
रोटियों को ता उमर ,
रोते रहे ।।

जिन्होंने पाषाण से ,
पर्वत गढ़े ।
उन्होंने न ग्रंथ थे ,
कोई पढ़े ।।

जो समय के साथ थे ,
आगे बढ़े ।
उन्नति की सीढ़ियां ,
वो ही चढ़े ।।

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