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14 May 2020 · 1 min read

" रूकता कहां है "

ये प्यार है जानम ,
इसका सिलसिला आंखों से शुरू हो कर भी आंखों पर रूकता कहां है ।

ये एहसास सिमट कर सिमटता कहां है ,
इस मोहब्बत का सिलसिला रूकना कहां है ।

ये हाले दिल समझ कर भी समझता कहां है ,
ये प्यार भरा दिल का दरिया रूकता कहां है ।

ये सजदे में तेरे झुक भी झुकता कहां है ,
ये बेकरारी का ख्याल रूकता कहां है ।

ये आंखों में छिप कर भी छिपता कहां है ,
ये आंखों की नमी बनी कर रूकता कहां है ।

ये मन की खुशबू बन कर महता कहां है ,
ये अश्कों का सिलसिला रूकता कहां है ।

ये तन निखर कर भी निखरता कहां है ,
ये हृदय टूट कर भी रूकता कहां है ।

? धन्यवाद ?

✍️ ज्योति ✍️

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