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14 May 2020 · 1 min read

{{ मुझे रुलाया न कर }}

मोहब्बत कर मुझसे बेइंतहा पर, थोड़ी वफ़ादारी से कर,
नज़्में तेरी सुन लेगे हम, तू बस सीने से लगा सुनाया कर,,

तेरे इश्क़ के आगे , ये ताजमहल क्या चीज़ है ,
बस तू मेरे ज़ज़्बातो की, कीमत न लगाया कर ,,

अच्छा लगता हैं, तेरे लबों से मेरा नाम अपना,
तू इन लबों पे किसी और , का नाम न लाया कर ,,

कहाँ दुनिया मे वो ताकत , के छीन ले तुझे मुझसे
तू बस अपने ज़हन में, किसी और कि हसरत न लाया कर,

सूज जाती हैं आँखे मेरी , साँसे भी भारी हो जाती है ,
कसम हैं तुझे, यू हँसते हँसते , मुझे न रुलाया कर,,

मोहब्बत के दमन पे कोई ,, दाग न लग जाये ,
यू रातो को छुपके से, मुझे मिलने न बुलाया कर ,,

जुदाई के खौफ़ से ,बहुत ज़ख्मी है दिल मेरा ,
तू बेवज़ह सवालों के तीर , मुझपे न चलाया कर ,,

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