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14 May 2020 · 1 min read

आओ प्रेम स्नेह बढ़ाए

आओ सीखे शिष्टाचार ।
सबसे करें सही व्यवहार ।।

कभी न करें किसी से छल ।
दुःखमय बन जाता कल ।।

क्षणिक मिलता इससे सुख ।
फिर मलिन हो जाता मुख ।।

झूठ का न लीजिए सहारा ।
जीत कर भी लगेगा हारा ।।

विश्वास कभी न तोड़ना ।
अपनो से मुँह न मोड़ना ।।

जीवन भाग्य से मिलता ।
सदकर्म से महान बनता ।।

क्रोध को न कभी घर लाइए ।
विवेक बुध्दि हनन हो जाए ।।

सबसे समानता कीजिए ।
भेद भाव गर्त में ले जाए ।।

सब ईश्वर की संतान हैं ।
मानव मानव सब समान है ।।

आओ प्रेम स्नेह बढ़ाए ।
नफरत को दूर भगाए ।।

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