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13 May 2020 · 1 min read

" वक्त "

वक्त की क्या औकात कि ,
हमें बता सके कौन है हमारा अपना – पराया ।
हम तो वो परिंदे है ,
हंस कर वक्त को भी है अपना बनाया ।

✍️ ज्योति ✍️

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