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13 May 2020 · 2 min read

~~((((तेरे जैसा यार कहाँ मिला))))~~

?((((तेरे जैसा यार कहाँ मिला))))?

बा खुदा मुझे कुदरत का एहसान
मिला,,सांसों के रूप में ज़िन्दगी जैसा यार
मिला.

बड़ी लगी ठोकर अपने ही घर में,,करके
मोहब्बत भी क़ातिल मेहरबान मिला.

युहीं गुजरी ज़ख़्मो के ऊपर से नमकीन हवा
फिर,,मुझे मेरे दर्द का कदरदान कहाँ मिला.

चाहा जिस हसीन को था दिल ने,,उसको
दिल बहलाने से आराम कहाँ मिला.

तड़प तड़प मैंने छोड़ी उम्मीद जीने
की,,ज़िन्दगी छोड़ने चला तो कोई मरने का
सामान कहाँ मिला.

शहजादा कहते थे लोग मुझे,,मुझे दर्द बनाने
को कोई मकान कहाँ मिला.

चलता रहा तन्हा सफर,,मुझे क़लम के बिना
कोई दिलदार कहाँ मिला.

लिखा फिर अमन ने खत क़लम को मूझे तेरे
जैसा यार कहाँ मिला,,मुझे तेरे जैसा यार
कहाँ मिला।

सब सुनाते रहे अपने ही किस्से,,मुझे मेरी
कहानी सुनाने का आराम कहाँ मिला.

मजहब वाले लड़ने में मसरूफ थे,,मुझे
इंसानियत का निशान कहाँ मिला.

गुजरा वक़्त भी बड़ा मंहगा था,,अकेला बैठा
रहा राजा ज़िन्दगी भर,,उसे आबाद वो
दीवान कहाँ मिला.

अनाथ था बचपन से कोई मजहब ना
था,,जलने को शमशान दफ़न होने को
कब्रिस्तान कहाँ मिला.

लिखा फिर अमन ने एक और खत क़लम
को मूझे तेरे जैसा यार कहाँ मिला,,मुझे तेरे
जैसा यार कहाँ मिला।

समझता रहा जिसे खुशियों का मेला,,भीड़
निकली तो बिखरे जूते चप्पल,,पत्थर
तलवारों के बिना कोई खाली स्थान कहाँ
मिला.

लड़ते कटते काटते मरते मारते रहे लोग लहू
के रंग को लेकर,,बहते खून में कोई और रंग
मुझे कहाँ मिला.

जला के मंदिर,मस्जिद,,कोई तो कहदे उसके
बाद मुझे अल्लाह यहाँ मिला,मुझे भगवान
यहाँ मिला.

रंग बिरंगे फूलों से बनता है गुलिस्तान,,खिलता
मुस्कराता अब वो हिंदुस्तान कहाँ मिला.

मिट गया में भी लिखते लिखते,,महफ़िल में
मुझे कोई इनाम कहाँ मिला.

लिखा फिरसे एक और खत क़लम को,,मुझे
तेरे जैसा यार कहाँ मिला,, मुझे तेरे जैसा यार कहाँ मिला.

✍️6.1aman??

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