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10 May 2020 · 1 min read

#मातृ-दिवस पर दोहे#

#मातृ-दिवस पर दोहे#

निस्वार्थ लुटाकर चले , ममता का संसार।
माँ देवी से कम नहीं , प्राणों का आधार।।

प्रकृति तुल्य माँ रूप है , सदा करे उपकार।
संतान रहे मौज़ मेंं , दुवा करे सौ बार।।

गंगा सरिस पवित्र मन , आशीष अमृत धार।
गोद स्वर्ग से कम नहीं , चरणों में संस्कार।।

माँ वीणा की तान है , माँ गीता का पाठ।
माँ ध्वनि मानो शंख की , माँ बंधन की गाँठ।।

–आर.एस.प्रीतम

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