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9 May 2020 · 1 min read

शर्माया मत कर

**** शर्माया मत कर *****
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हद से ज्यादा शर्माया मत कर
खामख्वाह इतराया मत कर

मेरी नींदों में आ कर हमनशीं
रात भर मुझे जगाया मत कर

आ जाते हो अक्सर ख्वालों में
ख्वाबों में मुझे सताया मत कर

कली से फूल बन गई हो तुम
दिल मे फसाद मचाया मत कर

मयकशी सा नशा है जवानी में
खुमारी में होश खोया मत कर

भरपूर यौवन का गरूर है तुम्हे
हमें राहों से भटकाया मत कर

नैनों से छलावा करती हो तुम
भ्रम में मुझे भरमाया मत कर

कातिलाना है नजर का जादू
निगाह से मार मुकाया मत कर

अदा अदाकारी के क्या कहने
यूँ जुल्मोसितम ढाया मत कर

सुखविंद्र दरिया सी गहराई है
गहराई में गोते लगाया मत कर
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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