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9 May 2020 · 1 min read

दोहे

विधा- दोहे
प्रदत्त शब्द- औचित्य, पुलिन, पूनम, साकेत, बुद्ध।

विद्या का #औचित्य क्या, बिना विनय, गुण, ज्ञान।
पढ़-लिखकर पाता मनुज, जीवन में सम्मान।।

बिना #पुलिन आधार के, मूरत गढ़ी न जाय।
वात चले जब ज़ोर से, माटी धूल उड़ाय।।

#पूनम की शुभ चंद्रिका, रति का ज्यों शृंगार।
प्राजक्ता की सेज प्रिय, करें प्रणय अभिसार।।

भटक रहा जन जगत में, धरे न मन में धीर।
राम धाम #साकेत में, हनुमत हरते पीर।।

प्रेम, दया अरु धर्म से, कर अनुशीलन #बुद्ध।
राग-रंग को त्याग दे ,तब मन होगा शुद्ध।।

डॉ. रजनी अग्रवाल ‘वाग्देवी रत्ना’
वाराणसी (उ. प्र.)

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