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21 Dec 2018 · 1 min read

कविता

कविता
भावनाओं की प्रसव से
गुजरकर होती
कविता की उत्पत्ति
कविता
संवेदनशील हृदय की व्युत्पत्ति
आस-पास
परिवेश को पढ़ना
मन में भावों को गढ़ना
विविध विचारों के
दग्ध-दाघ से द्रवित
अंतस के ज्वालामुखी से
निःसृत लावा
कोरे पृष्ठों पर उभरता है
बनकर
एक सार्थक शब्द-श्रृंखला
भावों की सफल अभिव्यक्ति
एक अनुपम शब्द-शक्ति
एक समिधा
संचरण की एक विधा
लिये सहज रूप अमिधा,
दर्शन भरी लक्षणा
या कोई
विशिष्ट व्यंजना
रस-छंद-अलंकार से भरपूर
शब्दाडम्बर से दूर
छंद का बन्ध
या निर्बन्ध,मुक्तछंद
पर,समाहित
सर्वथा एक अर्थ
सम्प्रेषण में समर्थ
कोरी कल्पना हो
या धरातल यथार्थ का
सर्वदा एक कथ्य होता
लिए कुछ तथ्य होता
देश,काल में
कुछ रूपांतर
पर,प्रवाहित होती
निरन्तर
भाव और अर्थ
के दो तीरों के बीच
मनोवेगों की सरिता-
कविता
-©नवल किशोर सिंह

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