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5 Nov 2016 06:10 PM

कृपया हमारे इस छंद ” ओंकार, अघनाशक, परम आनंद हैं जो … ” को साहित्य पीडिया फेशबुक पर साक्षा कर दीजिए
—- जितेंद्रकमलआनंद
५-११-१६

5 Nov 2016 06:07 PM

यह स्वरचित घनाक्षरी छंद हमारी पद्म पुनीता: ” राजयोग महागीता ” के ” प्रभु प्रणाम ” से हैं। जिसमें हमने मंगलाचरण के रूप में भगवान श्रीकृष्ण को उनके गुणगान गाते हुए सादर सप्रेम प्रणाम किया है।
— जिकेंद्रकमलआनंद
रामपुर ( उ प्र )

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