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आपकी रचना से प्रेरित मेरी प्रस्तुति :

नज़र से नज़र का असर है ,
जो इन नज़रों से बेख़बर है ,
वो एहसास -ए- शु’ऊर से बेअसर है ,
किसी ने जन्नत देखी है नज़रों में ,
किसी ने छलकता प्यार देखा है इन पियालों में .
कभी झलकता दर्द देखा है इन निगाहों में,
बहुत कुछ बयाँ कर देती है
ये नज़रें ,
कभी दर्द, कभी सुकुँ, देती हैं
ये नज़रें ,
कभी पैवस्त हक़ीक़त उजागर करतीं हैं
ये नज़रें ,
कभी ब़ेब़सी , कभी बे़सब्री का इज़हार करती हैं
ये नजरें ,
कभी ज़िदगी खु़शनुमा बना देती हैं
ये नजरें ,
कभी ज़िंदगी ग़मज़दा बना देती हैं
ये नज़रें।

कृपया विवेचना प्रस्तुत करें !

धन्यवाद ! 🌹

बहुत सुंदर रचना आदरणीय..👌👌💐💐

प्रोत्साहन का आभार !🌹

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