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14 Sep 2022 08:30 PM

बहुत खूब.. गलेनी की जात का मेला याद आ गया.. बचपन में खूब आनंद लिया करते थे ठोडो का.. साथ में डर भी लगता था शरी से, कहीं हमारी ओर न आ जाए।।

13 Sep 2022 12:15 AM

ठोडे के खेल का रुचिपूर्ण वर्णन जिसमें रोमांच, खेल भावना, सहनशक्ति और प्रतिद्वंदी के प्रति मैत्री भाव को बड़े ही सरल शब्दों मे गीत के रूप मे पिरोया है। एक गद्यात्मक कविता।

12 Sep 2022 10:20 PM

Kya baat Surinder .. har baat ko kavita me jod dete ho 👍

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