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Comments (94)

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यथार्थ पिता महज एक व्यक्ति नहीं वो तो पूरी दुनिया है🙏🙏

1 Oct 2022 04:01 PM

बहुत सुंदर प्रस्तुति श्रीवास्तव जी।

16 Oct 2022 04:47 PM

सादर आभार महोदय

14 Sep 2022 06:19 PM

उम्दा सृजन

16 Oct 2022 04:48 PM

सादर आभार… आदरणीया

जबरदस्त श्रीमान, जबरदस्त रचना

2 Sep 2022 04:19 PM

सादर आभार महोदय

15 Jun 2022 09:12 PM

शानदार सृजन

15 Jun 2022 10:52 PM

सादर आभार

15 Jun 2022 05:28 PM

Prasnna raho bete….

15 Jun 2022 05:29 PM

सादर चरण स्पर्श

14 Jun 2022 04:12 PM

Very nice….
U Define the all feelings of father in ur poem very nicely…

15 Jun 2022 05:29 PM

सादर आभार

9 Jun 2022 04:13 PM

बहुत सुंदर सृजन

10 Jun 2022 11:18 AM

सादर आभार संग नमन … आदरणीया

अति सुंदर रचना अधरणीय जी।

8 Jun 2022 08:48 PM

हार्दिक आभार संग नमन

एकदम सटीक अभिव्यक्ति

8 Jun 2022 08:48 PM

सादर आभार संग नमन

8 Jun 2022 12:29 PM

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

8 Jun 2022 08:48 PM

सादर आभार संग नमन

8 Jun 2022 10:58 AM

बिल्कुल सही लिखा आपने पिता महज…नमन आपकी सोच को आपकी लेखनी को

8 Jun 2022 08:47 PM

सादर आभार संग नमन

उत्तम सृजन ।

8 Jun 2022 10:12 AM

हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया ….

अति सुन्दर

8 Jun 2022 10:11 AM

सादर आभार संग नमन

7 Jun 2022 08:02 PM

बहुत ही सुंदर रचना।

7 Jun 2022 09:52 PM

सादर आभार संग नमन बहना

बहुत उम्दा भाव व शैली,

मेरी कविता “पिता”का अवलोकन भी जरूर करें

7 Jun 2022 09:52 PM

सादर आभार … आदरणीय

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। अतुलनीय है। शानदार और लाजवाब।भाषा का सुंदर संतुलन, शब्द नहीं है।

7 Jun 2022 09:51 PM

सादर आभार संग साधुवाद … प्रिय शेखर जी

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना है।

7 Jun 2022 09:50 PM

सादर आभार संग नमन

सुंदर … भावपूर्ण … अद्बुत रचना ….

7 Jun 2022 09:50 PM

सादर आभार संग नमन … आदरणीय

बहुत ही प्रभावी रचना l बधाईयाँ l

7 Jun 2022 09:49 PM

सादर आभार संग नमन …

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