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जब घुंगरूओ सी बजती है बूंदें ।
अरमा हमारे पलके ना मूंदे ।
कैसे देखे सपने नयन ।
सुलग सुलग जाए मन ।
भीगे आज इस मौसम में लगी कैसी ये अगन।
श़ुक्रिया

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18 Dec 2020 12:58 PM

वाहहह। बहुत खूब आदरणीय।

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