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ये ख़्वाहिशें हमें, क्या से क्या बना जाती हैं। जीवन का ये कड़वा सत्य है जिसके लिए इंसान कहाँ से कहाँ भटकता है ये रचना मेरे मन को बेहद छू गई मनीषा जी 👌👌👌 क्या बताये आप के कलम का जादु सर चढ़ के बोलता है गज़ब 💐💐💐

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25 Oct 2022 01:39 PM

इतनी हौसला अफ़ज़ाई के लिए हृदयतल से आभार शेखर जी🙏🙏🙏🙏

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