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ग़ज़ल // बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते /

यही उपहार देते रोज़ अपने /

ज़मीं से आसमाँ तक फैल जाएँ /

धनक में ख़्वाहिशों के रंग बिखरे /

नहीं टूटे कभी जो मुश्किलों से /

बहुत ख़ुद्दार हम ने लोग देखे /

ये कड़वा सच है यारों मुफ़्लिसी का /

यहाँ हर आँख में हैं टूटे सपने /

कहाँ ले जाएगा मुझ को ज़माना /

बड़ी उलझन है कोई हल तो निकले /

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