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13 Nov 2021 09:17 AM

इस कविता से ये पंक्तियां याद आ रही हैं… “दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी”

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