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सर मेरा मानना है कि विवाह किसी का निजी फैसला है और योग्यता के आधार पर सामाजिक दायित्व जरूर निजी के साथ साथ सामाजिक हो सकता है , फिर आपने अपने स्तर से और अपने स्वयं के एवं सामाजिक अनुभव से जो सलाह प्रस्तुत की है, चाहे उसे प्राप्त हो या ना हो और चाहे उसे भली लगे या ना लगे किन्तु आपने स्वक्ष मन से उज्ज्वल भविष्य की कामना हेतु अपने दिल के विचार प्रस्तुत किए हैं जिनका अन्यथा कोई तातपर्य ही नही है और जो प्रशंसनीय है ।

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