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बहुत सुंदर प्रस्तुति

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परियों की,दुनियाँ में हो ,आपका बसेरा
फूलों की ,हसीं वादियों में हो, आपका सवेरा
आप रहें ,सदा यू ही, हंसते मुस्कुराते ‘देव’
अब तो यही कहे ,हर पल, तन्हा दिल मेरा ?

बहुत बहुत शुक्रिया आपका

हर किसी को, हम अपना बना लेते हैं
दर्द दिलों के,अल्फाज़ों में सजा लेते हैं
बना लेते हैं आशियाना रूहानी मोहब्बत में ‘देव’
हसरतों की सरगोशियों से, दामन बचा लेते हैं
हार्दिक अभिनन्दन जी ??

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