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हस़रत थी ज़िंदगी गुलशन -ए-बहार सी मिले ,
नसीब़ में लिखे खिजाँँ -ओ- ख़ार ही मिले ,
ज़िंदगी भर तलाशता रहा दोस्त कोई मिले ,
जो भी मिले दोस्ती के नक़ाब में फ़रेबे यार मिले ,

श़ुक्रिया !

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30 Nov 2020 07:25 PM

श्रेष्ठ रचना

शुक्रिया इ

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