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दुश्मनों के जख्म तो हमने दिल पर पाए हैं ।
पर अपनों के दिए जख्म़ तो रु़ह पर पाए हैं ।

दिल ए नादान को ये इल्म़ न था के ज़माने की फ़ितरत वादा करके निभाने की नही है ।

श़ुक्रिया !

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25 May 2020 10:27 AM

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