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घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं।
कभी इस पग में कभी उस पग बंधता ही रहा हूं मै।
मै करता रहा औरों की कही ।
मेरी बात मेरे मन ही में रही।
फिर कैसा गिला जग से जो मिला।
सहता ही रहा हूं मैं।
घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं।

श़ुक्रिया !

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