दिल के गुबार जब जुबां पर आकर लफ्ज़ बनकर ढलते हैं। तो ग़ज़ल की शक्ल़ लेकर उभरते हैं । श़ुक्रिया !
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दिल के गुबार जब जुबां पर आकर लफ्ज़ बनकर ढलते हैं।
तो ग़ज़ल की शक्ल़ लेकर उभरते हैं ।
श़ुक्रिया !