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हो बाबा।

हो बाबा ।
गुरु देव महेश्वर छी।
केना भांग पियै छी।
केना गांजा पियै छी।
हो बाबा।
केना बौआइत रहल छी।
केना पगलायल रहल छी।
केना आंखि लाल रहल छी।
हो बाबा।
केना शिष्य सं खुश रहल छी।
जै शिष्यक वामा कनैत छी।
जै शिष्यक बुतरु बौआइत छी।
हो बाबा।
जै शिष्यक माइक लोर बहैत छी।
जै शिष्यक बाप कपार पीटैत छी।
हो रामा।
इ शिष्य हमरा बदनाम करै छी।
जेकर जेहन भावना छी।
वहिना हमर रुप देखै छी।
हो बाबा।
-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी।

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मैथिली और हिन्दी कविता कहानी लेखन

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