Read/Present your poetry in Sahityapedia Poetry Open Mic on 30 January 2022.

Register Now
· Reading time: 1 minute

” हमर कनिया हमर कविता “

डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
====================
किछु न किछु
कविता हम गढ़ेएत छी !
कोनो अवसर के
छंद मे कहैत छी !!
कवि त कोनो खास नहि छी
छंद कें स्वक्छंद बनि नुकसी लगवैत छी !
ककरा एहि युग मे फुर्सत छैक ?
सुनत आ बेसि कें कहत
” वाह -वाह क्या बात है “!
आइ एकटा कविता बनेलहूँ
पढि कें श्रीमती जी कें सुनेलहूँ
मन रखयला कहलखिन
” वाह -वाह क्या बात है ”
हम गदगद भेलहुँ
पुरस्कार स्वरुप ५००/-
रूपया देलयनि
वो बड खुश भेलीह
आर कहलनि
” दोसर कविता कहिया सुनायब ” ?
===================
डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
साउंड हेल्थ क्लिनिक
डॉक्टर’स लेन
दुमका
झारखण्ड
भारत

16 Views
Like
Author

Enjoy all the features of Sahityapedia on the latest Android app.

Install App
You may also like:
Loading...