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सुमिरन अहींक करै छी हम…

सुमिरन अहींक करै छी हम
(मैथिली गीत)
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जय माँ अंबे, जय जगदम्बे,
सुमिरन अहींक करै छी हम।
माता भवानी, माँ कल्याणी!
नाम अहींक बस लैअ छी हम।

जय माँ अंबे, जय जगदम्बे! ….

कोना प्रसन्न होयब हमरा पर,
ई तऽ हमरा ज्ञान नहिं ।
पुजा अराधना नित्य करी जेऽ,
एकर हमरा ध्यान नहिं ।

जय माँ अंबे, जय जगदम्बे! ….

शीश झुका कऽ विनती करै छी,
झोली निरधन के भरि दिअउ ने ।
महिमा अपरंपार अहां कऽ,
कष्ट मिटाऊ हे जगदम्बे ।

जय माँ अंबे, जय जगदम्बे! ….

कतेक कष्ट सहब अब एहिठाम,
मनुक्ख जन्म जे पायल छी हम ।
आश-निराश के भंवर में फंसि कऽ,
अहांक चरण में आयल छी हम।

करु भवपार हमरा, हे अम्बे!
सुमिरन अहींक, करै छी हम।

जय माँ अंबे, जय जगदम्बे! ….

मौलिक एवं स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – २२ /११ /२०२१
मोबाइल न. – 8757227201

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मनोज कुमार "कर्ण" "क्यों नहीं मैं जान पाया,काल की मंथर गति ? क्यों नहीं मैं समझ पाया,साकार की अंतर्वृत्ति ? मोह अब कर लो किनारा,जिंदगी अब गायेगी । सत्य खातिर…

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