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सियाराम

सियाराम
सियाराम आइ इ दुनिया में न हैय। परंच जौं अकेला में रहि छी त बड याद आबैय।हम दूनू गोरे संगी रही। स्कूल में साथे पढी। मिडिल स्कूल में त एके साइकिल सं स्कूल जाइ।उ बैक खींच के ले जाय।उ फस्ट करे आ हम सेकेंड करी।
हाइ स्कूल में हास्टल में एके रूम में रही।पढे में दूनू गोरे के कम्पटीशन रहे।अपन लालटेन साफ रखे मे भी कम्पटीशन रहे। लालटेन के शीशा एकदम साफ रहे। खूब इजोत दे।हां। पढ़ाई के कम्पटीशन में दूइ बजे रात सं पढाई शुरू क देबे।जब जाने कि हम पढब त उ अपन लालटेन के लौ कम के सुते के ढंग ध लेबे।कि हम सुत रही। तब हम देख के सुत रही। जब हम पढे ला उठी त देखै छी त सियाराम पढैत रहे। कभी हम सेकेंड करी त उ थर्ड आ उ सेकेंड करी त हम थर्ड।तेसर लैयका वरुण हमेशा फस्ट करे।
ग्यारहवीं यानी मैट्रिक के सेन्टप परीक्षा में एगो चौथा लैयका किशोर सेकेंड कैलक।हम थर्ड आ सियाराम चौथा स्थान पर चल गेल। वरुण फस्ट रहें। मैट्रिक बोर्ड में हम सेकेंड कैली आ सियाराम थर्ड। वरूण आ किशोर फस्ट। इण्टर में हम सेकेंड आ सियाराम थर्ड।
अब सियाराम पढाई छोड़ देलक आ नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र के एगो स्कूल में पढाबे लागल। सियाराम के शादी भेल।धिया पुता भेल। परंच सियाराम के एगो बडका बिमारी ब्रेन ट्यूमर हो गेल। दिल्ली में ब्रेन के सर्जरी भेल। परंच सियाराम अइ दुनिया के छोड़ के सदा के लेल चल गेल। आइ लगभग दस वरष भे गेल।हमहू अब सरकारी सेवा सं रिटायर्ड छी। परंच जब भी अकेला में होय छी सियाराम याद आबैय।
स्वरचित © सर्वाधिकार रचनाकाराधीन।
रचनाकार-आचार्य रामानंद मंडल सामाजिक चिंतक सीतामढ़ी।

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मैथिली और हिन्दी कविता कहानी लेखन

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