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“रविवारक छुट्टी ओगरबाहि मे बीतल “

डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
——————–
आई
पकड़ा
गेलहुं!
श्रीमती कहलनि ‘छत पर गेहूँ सुखा लिय
हम भानस करैत छी
देखब !
चिड़िया -चुनमुन
नहिं खाय ‘!
कुली -मिस्त्री
काज पर
लागल अछि
काज सेहो देखय पडत-रविवार अछि !
बड़ भ गेल
घुमनाए-फिरनाय
दिनभर क्लिनिक मे रहैत छी
नहि जानि कम्पुटर मे
की -की लिखैत छी ?
आई
किछु काज करू !
मानय पडल बात
करय पडल काज,
उपरे मे चाह भेटल
बैसले -बैसले
हम रहलों
घर सं
बाहर कतो नहि जा सकलहूँ !!
————————————————–
डॉ लक्ष्मण झा “परिमल ”
डॉक्टर ‘स लेन ,
दुमका

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