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मेरी वीरता।

मेरी वीरता पुकार रही है। दुष्टों से जंग करने के लिए कह रही है।पर! दुष्टों से जंग करने के लिए हथियार चाहिए। दुष्टों से जंग करने के लिए लक्ष्मण जैसा भाई चाहिए। अर्जुन जैसा गाण्डीव चाहिए।——सुग्रीव जैसा मित्र चाहिए। सीता जैसी नारी चाहिए।वीर पुरुष के जन्म लेने का समय चाहिए।वह द्वापर जैसा युग चाहिए। कौशल्या जैसी माता चाहिए।———–+–दशरथ जैसा पिता चाहिए। दुष्टों से जंग करने के लिए रणनीति चाहिए।

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Li.g.86.ayodhoya.nagar.bhopal.pin..462041 फूलचद रजक कवि एवं साहित्यकार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं लेखन, कविता कहानी एवं लेख विगत बीस बरसों से निरन्तर प्रकाशन। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, शासन द्वारा पुस्तक,"आत्म मंथन" सन् २०११ में…

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