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मिथिला

हे विदेह वंशुधारा हे माता,
हे अंग वंशुधारा हे माता ,
हे बज्जि वशुधारा हे माता,
हे जगत जननी हे भाग्य विधाता ,
हे कुलदेवी वन देवी विद्या-देवी हे माता,
हे शायमा देवी पटन देवी उग्रतारा धीमेश्वर
खलारी जानकी हे माता,
नित कट कट अर्हणा गंगा कमला कोशीक हे अनुपम धारा ,
हे भुवन संस्कार संस्कृतिक आचार सदा बान्हु,
लहू अर्पित तोहे ,लख लख परिपन्थी काटू तरूआर तेज आरा ,
हे मातृभूमि पवृित गौरवशाली रंग अहिने पग पग लागै

कविता क कुछ अंश

मौलिक एवं स्वरचित
© श्रीहर्ष आचार्य

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Author
विधा नन्द सिंह उपाख्य : श्रीहर्ष आचार्य शिक्षा : एम.एस-सी., एम.बी.ए. जन्म तिथि-1996 मैथिली, हिन्दी,संस्कृत ,खोरठा,अंग्रेजी,अवधी,बंगाली ब्रजभाषा,मगही में गजल, दोहा, गीत,कविता ,उपन्यास लेखन सम्मान/पुरस्कार : सरस्वती साहित्य सम्मान, ब्रजभाषा गौरव…

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