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बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब.

गोबर स निपल आंगन मे पिठारक अरिपन.
पिरही पर बैस बहिन के अंगना भरदुतिया नत पूरब.

भाई बहिन के निश्छल सिनेह समर्पण.
आश बहिन के राखब भैया जुग जुग अहाँ जीयब.

आई दौगल अबै हेतै हमरो भैया गाम स
बाट तकैत बहिन कहि भैया के नाम लअ

भैगना भैगनी सेहो खुशी मनबै छै
मामा अबै हथिन नाना गाम स

मामा एलै अपना बहिन गाम
भरदुतिया नत लेलकै केहेन सिनेहगर

भाए बहिन के पाबैन भरदुतिया अबौ
सबहक भाईक औरदा रहौ सब बहिन के आश रहौ.

जुग जुग जीबौ भाई बहिन सब
भरदुतिया मे बहिन अंगना नत पूरब.

कवि- किशन कारीगर
(©काॅपीराईट)

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कवि परिचय:- किशन कारीगर ( मूल नाम- डाॅ. कृष्ण कुमार राय). जन्म:- 5 मार्च 1983ई.(कलकता मे)। शिक्षाः- पीएच.डी(शिक्षाशात्र), एमएमसी(मास कम्युनिकेशन),एम्.एड,बी.एड, पि.जी.डिप्लोमा(रेडियो प्रसारण) । मैथिली/हिंदी/ बांग्ला मे किशन कारीगर उपनाम से…

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